Friday, 16 September 2011

muje gutan nahi chahiye

मुझे घुटन नहीं चाहिए
मुझे घुटन नहीं चाहिए
मैं जीना चाहता हूँ
सृष्टि में रमकर
सूरज की रोशनी बनकर
चाँद की चांदनी बनकर
आसमान का तारा बनकर
काले बादलों की बरसात बनकर
समुद्र का मोती बनकर
पहाड़ों से निकलती नदी बनकर
नदी की लहर बनकर
मुझे घुटन नहीं चाहिए
मैं जीना चाहता हूँ
सृष्टि में रमकर
शेर की दहाड़ बनकर
हाथी का मद बनकर
पक्षियों की चहचाहट बनकर
पेड़ों का पत्ता बनकर
फूलों की खुशबू बनकर
मुझे घुटन नहीं चाहिए
मैं जीना चाहता हूँ
सृष्टि में रमकर
त्यौहारों का उल्लास बनकर
मंदिर की आरती बनकर
किसानों का पसीना बनकर
मां की ममता बनकर
बच्चों की हंसी बनकर
मुझे घुटन नहीं चाहिए
मैं जीना चाहता हूँ
सृष्टि में रमकर

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